बिटकॉइन में पैसे लगाकर लाखों करोड़ों कमा रहे भारतीय

लगभग चार वर्ष पहले बिटकॉइन खरीदने वाले हर्षद गावड़े (32) को यह उम्मीद नहीं थी कि उनका यह इन्वेस्टमेंट इतना रिटर्न देगा कि जिससे पूरा देश घूमने का उनका खर्च निकल जाएगा। हर्षद अब इस मुनाफे की बदौलत उत्तराखंड में रूपकुंड से अपनी छह महीने की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।

मुंबई के रहने वाले हर्षद ने बताया, 'मैंने बिटकॉइन में तब इन्वेस्ट किया था, जब एक कॉइन की कीमत 28,000 रुपये थी और अब यह 10 गुना बढ़ चुकी है।' 30 अगस्त को एक बिटकॉइन की कीमत 2,91,822 रुपये थी। पिछले वर्ष नवंबर में डॉनल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से बिटकॉइन की वैल्यू लगातार बढ़ रही है। बहुत से लोग अब इन्वेस्टमेंट के जरिए के तौर पर वर्चुअल करंसी बिटकॉइन खरीद रहे हैं।

बिटकॉइन एक डीसेंट्रलाइज्ड, पेपरलेस क्रिप्टो करंसी है। इसका आविष्कार 2009 में हुआ था। दुनिया के देशों की करंसी के विपरीत क्रिप्टो करंसी को बैंक या एक कंसोर्शम जैसी कोई सेंट्रल अथॉरिटी प्रोड्यूस नहीं करती। बिटकॉइन 'माइनिंग रिग्स' कहे जाने वाले कंप्यूटर प्रोड्यूस करते हैं और ये कंप्यूटर इस वर्चुअल करेंसी को हासिल करने के लिए गणित की जटिल समस्याओं को हल करते हैं। एक लेजर सभी ट्रांजैक्शंस का रिकॉर्ड रखता है।

एक क्रिप्टो करंसी माइनिंग रिग हर समय काम करता है। इसका परफॉर्मेंस हाई-ऐंड ग्राफिक कार्ड और इस्तेमाल किए जाने वाले कूलिंग सिस्टम पर निर्भर करता है। माइनिंग रिग की औसत कीमत 3 लाख रुपये होती है। क्रिप्टो करंसी हासिल करने की बड़ी कंप्यूटिंग ताकत रखने वाली इन मशीनों में बहुत से ऑनलाइन वेंडर्स के साथ ही लोग भी इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

लेट्समाइन नाम के चंडीगढ़ के एक ऑनलाइन वेंडर ने 90 माइनिंग रिग बनाकर ईबे के जरिए बेची हैं। इनमें से प्रत्येक का प्राइस 3 लाख रुपये का है। लेट्समाइन पिछले एक वर्ष से माइनिंग रिंग बेच रहा है। यह कस्टमर्स को 8-9 महीनों में इन्वेस्टमेंट रिकवर होने का आश्वासन देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले वर्ष के अंत में नोटबंदी की घोषणा करने के बाद से भारत में बिटकॉइन की ट्रेडिंग काफी बढ़ी है। पिछले कुछ महीनों में देश के बिटकॉइन एक्सचेंजों का कारोबार काफी बढ़ा है और क्रिप्टो करंसी यूजर्स की संख्या 10 लाख से अधिक हो गई है।

क्रिप्टो करंसी की लोकप्रियता बढ़ने के कारण इनसे जुड़ी सर्विसेज का कारोबार भी बढ़ रहा है। टेक्नॉलजी प्रफेशनल साकेत नलेगांवकर अपने खाली समय में लोगों को माइनिंग के लिए रिग्स बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक वह 10 से अधिक लोगों को रिग्स बनाने में मदद कर चुके हैं और इनके अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस के लिए वह मंथली चार्ज लेते हैं।

Source : https://goo.gl/gewXHP

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